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My-poetry

2 years ago

अज़ीज़ बचपन

अज़ीज़ बचपन
वो शहर वो अपना मकानं याद आता है, वहां गुज़रा वो जिंदगी का स़फर याद आता है। वो दोस्त,वो गलियां,वो ख़ेल की दुनिया, उन सब का हँसता चेहरा याद आता हैं। वो देर तक चाँद को तकना,वो बादल में खो जाना, टूटते तारे से जो मांगा था वो सपना याद आता हैं।
2 years ago

अज़ीज़ बचपन

अज़ीज़ बचपन
2 years ago

ख़वाब की बात लिखें

ख़वाब की बात लिखें
2 years ago

अज़ीज़ बचपन

अज़ीज़ बचपन
2 years ago

अज़ीज़ बचपन

अज़ीज़ बचपन
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अज़ीज़ बचपन

अज़ीज़ बचपन